मेरा पन्ना

Saturday, August 8, 2015

दिया जला आया हूँ

खुदा के सामने दिया जला कर आया हूँ
अगर दुआं कबूल न हो तो मेरी कब्र पर इसे रख देना

अपनों के सामने दिल खोल आया हूँ
अगर फिजा मकबूल न हो मेरी सब्र की इन्तेहा न लेना

बारिशों मैं आग जला आया हूँ
अगर रोशन शमा न हो तो मेरी आखों मैं अँधेरा न रखना

अपना सब दाव पर लगा आया हूँ
अगर बाज़ी जीत न पाया तो मुझे भी नीलाम कर देना

खुदा के सामने दिया जला आया हूँ
अगर दुआं कबूल न हो तो मेरी कब्र पर इससे रख देना

Monday, July 20, 2015

शाम

ये शाम का किनारा,सुनहरा भी हैं laal भी..jaise झील पर शिकारा, सहलता भी हैं और शांत भी..
परिंदे उड़ रहे हैं तेज, जैसे कोई साख बुलाती हैं..
ये दिन का ढलना, दिल मैं भी हैं और साथ भी...

हवाए धीमी हैं पर हैं बहुत गहेरी
दुआएं अजानो मैं हैं,पर हैं बहुत फैली..
घंटिया बज उठी,हर मंदिर की देरी
इस वक़्त का लम्हा, हिन्दू भी हैं मुसलमान भी..

बहुत देर हुई दमकते की थक गया सूरज,,
इस रात मैं सुकून भी हैं आराम भी..
बादल उमड़ रहे हैं तेज, जैसे की बारिश बुलाती हैं..
ये  शाम का किनारा. सुनहरा भी हैं लाल भी..

खेतों मैं आज उगा हुआ एक छोटा पौधा..
देख रहा हैं एकटक ये मंजर अनोखा..
जिस ने दी उससे गर्मी अपनी रौशनी की..
वो सूरज अभी थोडा ठंडा भी हैं शांत भी..

सुन सको तो सुनो हैं इस शाम का भी एक गीत..
जिस मैं बस जिदगी हैं और अहिं उसकी रीत..
जो आया हैं वो जाता हैं.वावास आने को दोबारा..
अलविदा जैसा कुछ नहीं.. ये बस एक शाम का इशारा..

रुख्सह्त रौशनी की होगी एससी कोई प्रथा नहीं..
एक सूरज जायेगा तो होगी तारो की ररौशनी..
की रात कभी नहीं होगी अन्देहरी.. अगर मन मैं उजाला हो..
की वापस 

Tuesday, June 9, 2015

Meri tasveerin bachpan ki

Meri kuch tasveerin bachpan ki..
Jin mai muskura raha hoon main..
Na dar koi na koi haar ka gum..
Khaali haatho se bhi sab luta raha hoon main..

Meri kuch tasveerin bachpqn ki..
Jin main sapne saja raha hoon main..
Na Ghar ki fikar na duniya ka pata..
Nanhe se chere ko khila raha hoon main..

Meri kuch tasveerin bachpan ki..
Parindo ko uda raha hoon main..
Na shaq kahin na shikwa kisi se..
WO aayenge wapas sabko bata raha hoon main..

Meri kuch tasveerin bachpan ki..
Jin main jee raha hoon main..
Na hasrat koi na koi khawasih baaki..
Rang apne aasman main faila raha hoon main..

WO meri kuch tasveerin bachpan ki..
Ek baar fir ban jaaye haqiqat aaj...
Chala tej bahut door takal..
Khud ko tasveer main chhod aaya main..

Monday, May 4, 2015

चुनिन्दा..

चुनिन्दा साँसे हैं सबके हिस्से मैं..
या तो दम भर लो या धुंआ...
चुनिन्दा मोती हैं सबके हिस्से मैं..
या तो सागर भर लो या खजाना..

चुनिन्दा रास्तें हैं दुनिया मैं..
या तो साथ चल लो या तन्हा..
चुनिन्दा लफ्व्ज़ हैं होठो पे..
या तो इज़हार कर लो या दो गालियाँ..

चुनिन्दा हाथ हैं सबके हिस्से मैं..
या तो कतल कर लो या दुआं..
चुनिन्दा मिटटी हैं सबके हिस्से मैं..
या तो मौत उगा लो या खुशियाँ..

चुनिन्दा पल हैं सबके हिस्से मैं
या तो सपने सजा लो या कर दो फ़ना
चुनिन्दा हसरते हैं सबके हिस्से मैं..
या तो चैन ले लो या लो माया..

चुनिन्दा लाल रंग हैं सबके हिस्से मैं..
या तो इश्क से कमाओ या करो खून खराबा..
चुनिन्दा रिश्ते हैं सबके हिस्से मैं..
या तो दिल से निभाओ या करो बस दिखावा..


वो भी न समझे दिल की बात..

वो भी नहीं समझे दिल की बात
जिन्हें इश्क का गुमां था..
उनके दिल मैं भी हैं डर के जज्बात
जिन्हें इश्क का खुमार था

हार गया वो किशन भी दुनिया से
जिसके ऊँगली पर पहाड़ था..
राधा बोली न कुछ, सर झुकाए रही
उसे भी करना दुनिया की रीत पर ऐतबार था...

कभी सोचा हैं क्यों गिरता हैं पानी सैलाब मैं
उसके पास भी तो झील सा ठेराब था..
टकराता रहा हर पत्थर से वो
कुछ ऐसा दीवाना नदी का बहाब था...

वो चाँद भी इंतज़ार करता हैं रात का..
जिस रात मैं  बस तन्हाई का करार था..
देता रहा रौशनी अधेरों को भी..
उसके खुद के हिस्से मैं भी जबकि काला दाग था..

ये प्यार नहीं था वक़्त बिताने की बात..
ये तो कई जन्मों का त्यौहार था..
रोक लो चाहे किसी भी बहाने से इसे आज ..
परजो अब मेरा हाल हैं कभी तुम्हारा हाल था..

चलती रही दुनिया.. पूजा गया किशना..
बिना राधा के न उसका नाम था..
बहता रहा पानी.. रुका न कभी..
बिना नदी के जिन्दगी न बहाल था..

होती रही सुबह .. आता रहा सूरज...
बिना चाँद के ना रात  न खाव्ब था..
समझेंगे कभी वो भी दिल की बात..
जिन्हें इश्क का गुमां था...