मेरा पन्ना

Monday, May 4, 2015

चुनिन्दा..

चुनिन्दा साँसे हैं सबके हिस्से मैं..
या तो दम भर लो या धुंआ...
चुनिन्दा मोती हैं सबके हिस्से मैं..
या तो सागर भर लो या खजाना..

चुनिन्दा रास्तें हैं दुनिया मैं..
या तो साथ चल लो या तन्हा..
चुनिन्दा लफ्व्ज़ हैं होठो पे..
या तो इज़हार कर लो या दो गालियाँ..

चुनिन्दा हाथ हैं सबके हिस्से मैं..
या तो कतल कर लो या दुआं..
चुनिन्दा मिटटी हैं सबके हिस्से मैं..
या तो मौत उगा लो या खुशियाँ..

चुनिन्दा पल हैं सबके हिस्से मैं
या तो सपने सजा लो या कर दो फ़ना
चुनिन्दा हसरते हैं सबके हिस्से मैं..
या तो चैन ले लो या लो माया..

चुनिन्दा लाल रंग हैं सबके हिस्से मैं..
या तो इश्क से कमाओ या करो खून खराबा..
चुनिन्दा रिश्ते हैं सबके हिस्से मैं..
या तो दिल से निभाओ या करो बस दिखावा..


वो भी न समझे दिल की बात..

वो भी नहीं समझे दिल की बात
जिन्हें इश्क का गुमां था..
उनके दिल मैं भी हैं डर के जज्बात
जिन्हें इश्क का खुमार था

हार गया वो किशन भी दुनिया से
जिसके ऊँगली पर पहाड़ था..
राधा बोली न कुछ, सर झुकाए रही
उसे भी करना दुनिया की रीत पर ऐतबार था...

कभी सोचा हैं क्यों गिरता हैं पानी सैलाब मैं
उसके पास भी तो झील सा ठेराब था..
टकराता रहा हर पत्थर से वो
कुछ ऐसा दीवाना नदी का बहाब था...

वो चाँद भी इंतज़ार करता हैं रात का..
जिस रात मैं  बस तन्हाई का करार था..
देता रहा रौशनी अधेरों को भी..
उसके खुद के हिस्से मैं भी जबकि काला दाग था..

ये प्यार नहीं था वक़्त बिताने की बात..
ये तो कई जन्मों का त्यौहार था..
रोक लो चाहे किसी भी बहाने से इसे आज ..
परजो अब मेरा हाल हैं कभी तुम्हारा हाल था..

चलती रही दुनिया.. पूजा गया किशना..
बिना राधा के न उसका नाम था..
बहता रहा पानी.. रुका न कभी..
बिना नदी के जिन्दगी न बहाल था..

होती रही सुबह .. आता रहा सूरज...
बिना चाँद के ना रात  न खाव्ब था..
समझेंगे कभी वो भी दिल की बात..
जिन्हें इश्क का गुमां था...

Sunday, December 21, 2014

Hope...

Among All clouds that we could see..
There is an hope, that we could flee..
It's all wait there till it's night..
Before span our wings in sunshine light...
Life is harmony of curves and slop..
What makes it melodious.. Is everlasting hope..
Oh yes, among all clouds, that i could see..
There is always an hope, that i could flee..

Saturday, December 13, 2014

ज़न्नत मैं उठ रहा हैं धुंआ


ये जो ज़न्नत मैं उठ रहा हैं धुंआ..
किसी चिनार मैं आग लगी हो जैसे.
आवाज की परवाज गुम हो गयीं कहीं..
कि किसी दीवार मैं उसे चिनवाया हो उसे..

तकसीन की तारीफ क्या बयाँ करे यहाँ
रोशन हुई थी हर महफ़िल इनायत हो जैसे..
ये जो ज़न्नत मैं उठ रहा हैं धुँआ
किसी चिनार मैं आग लगी हो जैसे..

शिकारे दरिया मैं बहते नही अब फलक तक..
की पानी ने बर्फ की शक्ल अख्तियार की हो जैसे..
सरताज और सह्बाज़ हैरान हैं दोनों ही..
ऊँचाइयों का इस कदर गुमां इंसान को हुआ कैसे..

ये जो ज़न्नत मैं उठ रहा हैं धुआं..
किसी चिनार मैं आग लगी हो जैसे..


Sunday, November 9, 2014

sun le re.. [ on rhythm of "Say it" by Enrique ]

 Sing it with rhythm of Say it by Enrique

तन्हा..तन्हा से, दिल ये.. मेरे दिन ये..रहते हैं
खाली.. खाली सी, रातें.. मेरी बातें ये..कहते हैं
कैसा हुआ हैं ये नशा...मुझे कुछ पता नहीं
कैसा हैं ये दर्द की इसकी...कोई दवा नहीं....

सुन ले रे खुदा ये..अगर तू जाग रहा हैं
बन्दों को ताक रहा हैं..
की कैसी हैं फिजा यू..

होके खफा क्यू.. तकलीफे बाट रहा हैं..
खुशियों को छाट रहा हैं..
की हर इंसा क्यू..

सहमे.. सहमे सहमे चेहरे.. दिलो पर पहेरे ,रहते हैं..
लम्हे...खोये वो लम्हे.. यादो मैं अब भी, रहते  हैं..
कैसा हुआ हैं ये नशा...मुझे कुछ पता नहीं
कैसा हैं ये दर्द की इसकी.  कोई दवा नहीं....

सुन ले रे खुदा ये..अगर तू जाग रहा हैं..
बन्दों को ताक रहा हैं..
सुनके हर दुआ को...]

कि इस कदर रुस्वा क्यू.. मौसम हो रहा हैं..
अश्को मैं हो रहा हैं..
हर ख्वाब बयाँ यू..

कैसा हुआ हैं ये नशा...मुझे कुछ पता नहीं...
कैसा हैं ये दर्द की इसकी.  कोई दवा नहीं...

सुन ले रे खुदा ये..अगर तू जाग रहा हैं
बन्दों को ताक रहा हैं..
की कैसी हैं फिजा यू..