मेरा पन्ना

Sunday, July 20, 2014

क्या हैं?

वक़्त की इस तस्वीर मे,छुपा क्या हैं?
तेरा और मेरा घुनाह क्या हैं?
समझे खुद को,या खुद को समझाये
आग बाकी हैं अभी,फिर ये धुंआ क्या हैं?

दूर कहीं खुप जायेंगे हम तुम
फिर क्या खुदा,और दुआ क्या हैं?
संभले खुद से,या खुद को सम्भाले
बात बाकी हैं अभी,फिर होश गुमां क्या हैं?

तारीफ तेरे तब्बसुर की कर लिया करेंगे
फिर क्या शब्,और सुबह क्या हैं?
मनाये खुद को या खुद से मान जाये
जंग जब अपनों से हो,तो जीत हार का निशाँ क्या हैं?

Thursday, June 5, 2014

बंजारा दिल

बंजारा हैं, ये दिल तेरा
बेगाना सा, ये बंजारा हैं
नजारा हैं, ऐसा इस  दिल का
अनजाना सा, ये नजारा हैं

यूं तो हँस लेता हैं तेरे सामने..
फिर भी छुप के ये क्यू, रो लेता हैं...
खुद से ही होके कहीं ये गुमशुदा
अपना पता फिर सबको बता देता हैं

बंजारा हैं, ये दिल तेरा
बेगाना सा, ये बंजारा हैं
नजारा हैं, ऐसा इस  दिल का
अनजाना सा, ये नजारा हैं

जाने किस की खबर, ये रखता हैं..
खुद का तो इसे, कोई इल्म नहीं..
किसके khawaon मैं यूं, खोया हैं फिरा
अपने सपनो की इसको फ़िकर नही

 बंजारा हैं, ये दिल तेरा
बेगाना सा, ये बंजारा हैं
नजारा हैं, इस  दिल का
अनजाना सा, ये नजारा हैं

आ जरा रोक ले तू अब इसे..
बेफ़िकर ये फिर से कहीं उड़ चला
ना जाने किस की धुन मैं यूं खोया..
सब मिला हैं फिर भी हैं ये जुदा.

बंजारा हैं, ये दिल तेरा
बेगाना सा, ये बंजारा हैं
नजारा हैं,  इस  दिल का
अनजाना सा, ये नजारा हैं

Monday, June 2, 2014

वो पत्ता


बहुत दूर एक पत्ता दिखा समुन्दर पर
सोचा मैंने की ये किस की इनायत हैं?
फिर आया जबाब इस दिल से,
शायद ये किसी तूफ़ान की बरकत हैं

वो साख टूट गयीं जिस पर उगा था ये,
हवाओ के जोश मैं खेला कुंदा था ये
सारे साथी खो गए जिस तूफ़ान में,
शायद इसे उसी तूफ़ान से शिकायत हैं

गहेरी थी यूं तो जड़ें इसके तने की
मिटटी के आगोश मैं फैला फला था ये
सारी नीव हिल गयीं इसकी तूफान में
शायद कुछ ऐसी हुई क़यामत हैं

फिर भी क्यू समुन्दर पर तैर रहा हैं वो
पुछा मैंने जब इस नादान से
हिलोरे लेता हुआ बोला वो बड़े गुमान से
उजड़ कर फिर बस जाना हैं एक दिन
ये ही तो जिन्दगी की शरारत हैं

ye dil

paani ke ooper thera ek shiakara hain ye dil
kahani ke panno par ek ishara hain ye dil
pata nhi chalta is main chupa kya kya hain
mere sapno aur shauk ka pitara ye dil..

kai dino se ruka hain kisi ek moad par..
besabab beinthaan bekaara hain dil
khata nhi karta fir bhi maafi maang leta hain
mere apno aur gairon ka maara hain ye dil..

Wednesday, April 9, 2014

aasmaani sunheri shurkhiyaan


aasmaani sunheri shurkhiyaan, dhikti hain jab..
manjil ki chaah nhi, safar hi suhana hota hain..
beparwah begaani galtiyaan, hoti hain jab..
joothi koi wafa nhi, kafir bhi diwaana hota hain..

do kisse humne kya kahe,

sau baatain jamana bana leta hain..
kisi ke dil ka jaane kya, 
hame to apna haal na pata hota hain..

wo khaawb kya hamare choote kahin..

har koi usse apna fasaana bana leta hain..
mil jaate hain kuch is tarah se humse wo..
jaise shaam aur samundar ka kinara hota hain..

nakhush ho log,koi farak nhi hota..

jab apne dil ko sukoon ka ishara hota hain..
aasmaani sunheri shurkhiyaan, dhikti hain jab..
manjil ki chaah nhi, safar hi suhana hota hain..